भूल जाते हो
भूल जाते हो
कि तुम भूल जाते हो
रोज़ रात ख़्वाबों में आना
ख़्वाबों में कोई ख्वाब सजाना
पर सुबह उठके जल्दी जगाना
तुम भूल जाते हो ।
बहुत देर होने से पहले
कोई सच बताना
हर रात मुझे यूँ ही सताना
मेरे कंधे पे सर रख के
अपनी आँखों से बहते हुए काजल छुपाना
तुम भूल जाते हो ।
तुम भूल क्यों नही जाते
मैं कितना तुमसे लड़ता हूँ
तुम भूल क्यों नही जाते
की म तुमसे कितना प्यार करता हूँ
मुझपे अपने हक़ जताना
ज़िद करके अपनी बात मनवाना
मुझे रुला के
फिर गले लगाना
तुम भूल जाते हो ।
भूल जाओ कि इस कायनात में
तेरा कोई मोहताज़ था
भूल जाना के मैं तुमसे कभी
ये शायरी कही थी
ये सोच के भूल जाना
कि मुझसे भी भूल से एक भूल हो गयी थी
तुम भूल क्यों नही जाते
कि मैं तुम्हें भूल चुका हूं
पर ये बात हर रात
मैं भूल जाता हूँ ।

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