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ਵੇਖਿਆ

                                  ਵੇਖਿਆ ਕੁਦਰਤ ਦੇ ਕਾਇਲ ਨੇ ਆਖਿਆ ਮੈਨੂੰ ਸਾਗਰ ਤੋਂ ਗਹਿਰਾ ਓਹਨੇ ਕੋਈ ਸਾਰ ਨਹੀਓ  ਵੇਖਿਆ , ਮੈਂ ਹੱਸਕੇ ਜੇ ਟਾਲ ਦਿੱਤਾ ਓਹਦੀ ਗੱਲ ਨੂੰ ਤੂੰ  ਬੇਇਨਤੀਹਾ  ਦੀ ਅੱਖਾਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਾਰ ਨਹੀਓ ਵੇਖਿਆ । ਲੱਗੇ ਜੋ ਤੈਨੂੰ ਮਿਸਰੀ ਤੋਂ ਨਾ ਮਿੱਠਾ ਕੁਛ  ਤੂੰ ਹਾਲੇ ਓਹਦੀ ਗੱਲਾਂ ਦਾ ਜਾਲ ਨਹੀਓ ਵੇਖਿਆ । ਆਖੇ ਰਾਹੀ ਥੱਕ ਕੇ ਜੋ ਵਾਟ ਬੜੀ ਲੰਮੀ ਆ ਵੇ ਤੁਸੀਂ ਕਰਦੇ ਮੈਨੂੰ ਓਹਦਾ  ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਨਹੀਓ ਵੇਖਿਆ । ਕੋਈ ਆਖਦਾ ਖੁਦਾ ਨਾਲੋਂ ਉੱਚਾ ਨਹੀਓ ਕੋਈ ਵੀ ਤੂੰ ਮੇਰਾ ਹਾਲੇ ਤੱਕ ਓਹਦੇ ਲਈ ਪਿਆਰ ਨਹੀਓ ਵੇਖਿਆ । ਸੱਚ ਵੀ ਮੈਂ ਵੇਖੇ ਕਈ  ਰੱਬ ਵੀ ਮੈਂ ਵੇਖਿਆ  ਵੇਖਣਾ ਸੀ ਜੋ  ਓਹਦੀਆਂ ਅੱਖਾਂ ਦੇ ਵਿੱਚ  ਬੱਸ ਮੇਰੇ ਲਈ ਇੱਕ ਪਿਆਰ ਨਹੀਓ ਵੇਖਿਆ ।                                                     ...

आंसुओं से फूल खिलते

                                                                      आंसुओं से फूल खिलते यह सफर ना छोड़े. साथ मेरा   मंज़िल को भुलाना मुश्किल है  इलज़ाम मैं अपनी मौत का किस पर दू  मेरे अपने ही इस बात में  शामिल है  कर्ज़दार करगए वो जिनके चेहरे से  दिन की शुरुआत होती  अगर मेरे आंसुओं से फूल खिलते  तोह सोचो उन फूलों की क्या बात होती  |  जिन्हे ढूंढता रहा दिल की गेहराईओ में  उन्होंने नफरतों का निवाला मेरे दिल को खिला दिया  तन्हा रहगया था जो तन्हाईओं में  उसने आंसुओं को अपने नसीब से  मिला लिया  एक एहसास जो प्यार का था अब उनसे ना मेरी मुलाक़ात होती  अगर मेरे आंसुओं से फूल खिलते  तोह सोचो उन फूलों की क्या बात होती |  पता नहीं लगता अब इस दिल को  कौन दूर ...

तवायफ

                                                                                 तवायफ मुझे उससे प्यार हुआ जिसे दुनिया तवायफ देखती है तुम्हारी हवस की आग के लिए अपना जिस्म बेचती है । शरीफों के मोहल्ले ने कहा क्या इज़्ज़त तुम्हारी  मैं जिस्म अपना बेचती हूँ कुछ दरिंदों से  घर की इज़्ज़त  बचाने के लिए तुम्हारी । कुछ लड़कियों के साथ ज्यादती हुई जिनकी तुम्हें फिक्र थी चल पड़े तुम लेके मोमबत्तियां दुनिया को दिखाने में  सुनाऊँ मैं अगर अपनी कम पड़ जाएगा सूरज भी मोमबत्तियां जलाने में  । तवायफ  जिस रात मुझको बनाया गया भरे बाज़ार में  तमाशबीनों के बीच  कुछ इज़्ज़तदार भी खड़े थे जिनका हाथ था मेरी इज़्ज़त मिट्टी में मिलाने में । न समझ थी मैं  मुझको मेरे माँ बाप से छीनकर मेरी बचपन जला द...

बिखर जाऊँगा

                              बिखर जाऊँगा  दिल-ऐ-उम्मीद को तोड़ा है किसी ने, जीने की उम्मीद को तोड़ा है किसी ने, अब इतना टूट चुका हूं, कि छूने भर से बिखर जाऊँगा। वो हमसफर था, हमनवा हो गया, वो हमारा था मगर, हमसे खफा हो गया, अब डर लगता है, कहीं उसके खवाबों से उठ न जाउगा, अब इतना टूट चुका हूं कि, छूने भर से बिखर जाऊंगा। सफर में हमारा साथ छोड़ गया, मेरे सारे सपने तोड़ गया, मंज़िल अपनी देख कर, मेरे राह मोड़ गया, मगर फिर भी मैं चलता रहा, कभी बिखरता , कभी संभलता रहा, अकेले चला था, अकेले ही चलता जाऊँगा, अब इतना टूट चुका हूं कि, छूने भर से बिखर जाऊँगा। टूटे हुए अल्फ़ाज़ सा हूँ, बिखर गया हूँ, हूँ टूटे हुए हीरे सा, मार खा खा के निखर गया हूँ, मार दे ना तू और दोस्ती की, कर एक न मुझ टूटे को, अब और सितम न  सह  पाउँगा, अब इतना टूट चुका हूं कि , तेरी नज़रों से ही बिखर जाऊँगा। थक गया हूँ मैं, बिन मंज़िल के, रोज़ रोज़ के सफर से, वादों...

भूल जाते हो

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                 भूल जाते हो  कि तुम भूल जाते हो  रोज़ रात ख़्वाबों में आना  ख़्वाबों में कोई ख्वाब सजाना  पर सुबह उठके जल्दी जगाना  तुम भूल जाते हो । बहुत देर होने से पहले  कोई सच बताना  हर रात मुझे यूँ ही सताना  मेरे कंधे पे सर रख के  अपनी आँखों से बहते हुए काजल छुपाना  तुम भूल जाते हो । तुम भूल क्यों नही जाते  मैं कितना तुमसे लड़ता हूँ  तुम भूल क्यों नही जाते की म तुमसे कितना प्यार करता हूँ  मुझपे अपने हक़ जताना  ज़िद करके अपनी बात मनवाना  मुझे रुला के  फिर गले लगाना  तुम भूल जाते हो । भूल जाओ कि इस कायनात में  तेरा कोई मोहताज़ था  भूल जाना के मैं तुमसे कभी  ये शायरी कही थी  ये सोच के भूल जाना  कि मुझसे भी भूल से एक भूल हो गयी थी  तुम भूल क्यों नही जाते  कि मैं तुम्हें भूल चुका हूं पर ये बात हर रात               ...

जवाब

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                               जवाब              बहुत वक्त हो गया तुझसे बात किये हुए ,            आज तेरी याद भी ,            मुझसे मेरा हाल पूछने लगी ।           नींदों से छुपता छुपाता,           खुद से तेरा हाल पूछने लगा ,          और न जाने कहीं से जवाब आते रहे।           सुना है,           सीख गए हो इस दुनिया में जीना,           मुझे इन फ़िज़ाओं ने कहा था ।                 बताया था चाँद ने,          कि  रोए तुम भी उस रात बहत ,          तेरी आँखों से छलके,         एक एक गर्म दरियाओं ने कहा ...

बदल जाएगी

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                                                             बदल_जाएगी  होगें तुम भी कभी मोहताज़ मेरे जिस दिन क़यामत आएगी उस रोज़ तुम्हारी यह ना भी  आँसुओं में छटकर  हां मे बदल जाएगी | मैं सुन न उस पल पाउँगा तुम्हारी उस पुकार को  तुम्हारी चीख को पुकार को तुम्हारे उस इकरार को  देखकर ठंडी देह  मेरी  तू भी पिघल जाएगी  उस रोज़ तुम्हारी यह ना भी  आँसुओं में छट कर  हां में बदल जाएगी । राज़ राज़  ही रह जाएगा  अगर वो शाम आ ढले बैठे होंगे तुम अकेले  तुम बस , मेरे  ईंतजार को । कोसना मत मेरी जान को के प्यार वो न कर सके थी उनकी भी मजबूरिया इस जग से न  वो लड़ सके । कयामत है..... किसी न किसी शाम जरूर आ जाएगी  इंतज़ार है हमें  भी  उस  शाम  का  जब तुम्हारी ना भी  हाँ में बदल ज...