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आंसुओं से फूल खिलते

                                                                      आंसुओं से फूल खिलते यह सफर ना छोड़े. साथ मेरा   मंज़िल को भुलाना मुश्किल है  इलज़ाम मैं अपनी मौत का किस पर दू  मेरे अपने ही इस बात में  शामिल है  कर्ज़दार करगए वो जिनके चेहरे से  दिन की शुरुआत होती  अगर मेरे आंसुओं से फूल खिलते  तोह सोचो उन फूलों की क्या बात होती  |  जिन्हे ढूंढता रहा दिल की गेहराईओ में  उन्होंने नफरतों का निवाला मेरे दिल को खिला दिया  तन्हा रहगया था जो तन्हाईओं में  उसने आंसुओं को अपने नसीब से  मिला लिया  एक एहसास जो प्यार का था अब उनसे ना मेरी मुलाक़ात होती  अगर मेरे आंसुओं से फूल खिलते  तोह सोचो उन फूलों की क्या बात होती |  पता नहीं लगता अब इस दिल को  कौन दूर ...