तवायफ
तवायफ मुझे उससे प्यार हुआ जिसे दुनिया तवायफ देखती है तुम्हारी हवस की आग के लिए अपना जिस्म बेचती है । शरीफों के मोहल्ले ने कहा क्या इज़्ज़त तुम्हारी मैं जिस्म अपना बेचती हूँ कुछ दरिंदों से घर की इज़्ज़त बचाने के लिए तुम्हारी । कुछ लड़कियों के साथ ज्यादती हुई जिनकी तुम्हें फिक्र थी चल पड़े तुम लेके मोमबत्तियां दुनिया को दिखाने में सुनाऊँ मैं अगर अपनी कम पड़ जाएगा सूरज भी मोमबत्तियां जलाने में । तवायफ जिस रात मुझको बनाया गया भरे बाज़ार में तमाशबीनों के बीच कुछ इज़्ज़तदार भी खड़े थे जिनका हाथ था मेरी इज़्ज़त मिट्टी में मिलाने में । न समझ थी मैं मुझको मेरे माँ बाप से छीनकर मेरी बचपन जला द...