बदल जाएगी
बदल_जाएगी
होगें तुम भी कभी मोहताज़ मेरे
जिस दिन क़यामत आएगी
उस रोज़ तुम्हारी यह ना भी
आँसुओं में छटकर
हां मे बदल जाएगी |
मैं सुन न उस पल पाउँगा
तुम्हारी उस पुकार को
तुम्हारी चीख को पुकार को
तुम्हारे उस इकरार को
देखकर ठंडी देह मेरी
तू भी पिघल जाएगी
उस रोज़ तुम्हारी यह ना भी
आँसुओं में छट कर
हां में बदल जाएगी ।
राज़ राज़ ही रह जाएगा
अगर वो शाम आ ढले
बैठे होंगे तुम अकेले
तुम बस , मेरे ईंतजार को ।
कोसना मत मेरी जान को
के प्यार वो न कर सके
थी उनकी भी मजबूरिया
इस जग से न वो लड़ सके ।
कयामत है.....
किसी न किसी शाम जरूर आ जाएगी
इंतज़ार है हमें भी उस शाम का
इंतज़ार है हमें भी उस शाम का
जब तुम्हारी ना भी
हाँ में बदल जाएगी।।।।
हाँ में बदल जाएगी।।।।

bhut kaim veer 👌👌👌
ReplyDeleteAwesome bro
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